महाशिवरात्रि पर इन मंत्रों का करें जाप, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगी जीवन की परेशानियां

Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर इन मंत्रों का करें जाप, भगवान शिव की कृपा से दूर होंगी जीवन की परेशानियां

Maha Shivratri 2026: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना, व्रत और मंत्र-जाप करने से साधक के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। महानिशीथ काल रात्रि 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जिसे शिव साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा, रुद्राभिषेक और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से विशेष सिद्धियों की प्राप्ति होती है। अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं दांपत्य सुख के लिए व्रत रखती हैं। देशभर में स्थित बारह ज्योतिर्लिंग में भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक का आयोजन किया जाता है।

महाशिवरात्रि 2026 पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और मंत्र जाप करते श्रद्धालु।


महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व

पुराणों में उल्लेख है कि इसी रात्रि में भगवान शिव ने तांडव किया था और शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए इस रात्रि को ‘शिव की रात्रि’ कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चतुर्दशी तिथि पर चंद्रमा क्षीण अवस्था में होता है, जिससे मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे में शिव मंत्रों का जाप मानसिक संतुलन और आत्मबल प्रदान करता है।

महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर की पूजा का विधान है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है। विशेष रूप से महानिशीथ काल में मंत्र-जाप को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।


समस्याओं से मुक्ति के लिए करें इन मंत्रों का जाप

1. कार्यों में सफलता और परिवार के कल्याण के लिए

यदि आप अपने कार्यों में सफलता और परिवार के मंगल की कामना करते हैं, तो शिव तांडव स्तोत्र के इस मंत्र का श्रद्धा से जाप करें—

“जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्।।“

यह मंत्र ऊर्जा, आत्मविश्वास और निर्णायक क्षमता को मजबूत करता है।


2. परिवार में प्रेम और सामंजस्य के लिए

अगर घर में अनबन रहती है तो यह मंत्र पारिवारिक सौहार्द बढ़ाने में सहायक माना गया है—

“जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी…
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम।।“

नियमित जाप से पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है।


3. मानसिक उलझन और तनाव से मुक्ति के लिए

छोटी-छोटी बातों पर तनाव हो तो इस मंत्र का जाप लाभकारी है—

“जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा…
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि।।“

यह मानसिक स्पष्टता और धैर्य प्रदान करता है।


4. धन स्थिरता और आर्थिक मजबूती के लिए

यदि धन आता है लेकिन टिकता नहीं, तो यह मंत्र आर्थिक स्थिरता हेतु जपा जाता है—

“सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर…
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः।।“

मान्यता है कि इससे लक्ष्मी स्थिर होती हैं और बचत में वृद्धि होती है।


5. दांपत्य जीवन में सुख-शांति के लिए

वैवाहिक जीवन में सामंजस्य हेतु इस मंत्र का जाप करें—

“करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल…
त्रिलोचने रतिर्मम।।“

यह दंपतियों के बीच समझ और प्रेम बढ़ाता है।


6. नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में लाभ के लिए

करियर ग्रोथ और बिजनेस सफलता के लिए यह मंत्र जपा जाता है—

“नवीनमेघमण्डलीनिरुद्धदुर्धरस्फुर…
श्रियं जगद्धुरन्धरः।।“

यह समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माना जाता है।


7. अज्ञात भय से मुक्ति के लिए

अगर मन में अनजाना भय रहता हो तो यह मंत्र लाभकारी है—

“अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी…
तमन्तकान्तकं भजे।।“

यह साहस और आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।


8. पारिवारिक सुख और समृद्धि के लिए

परिवार में सुख-समृद्धि हेतु इस मंत्र का जाप करें—

“कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्…
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम्।।“


9. सदैव प्रसन्न रहने के लिए

मानसिक प्रसन्नता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए—

“निलिम्पनाथनागरी कदम्बमौलमल्लिका…
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहर्निशम्।।“


10. शत्रु विजय और कार्य सिद्धि के लिए

विजय प्राप्ति हेतु यह मंत्र जपा जाता है—

“प्रचण्डवाडवानलप्रभाशुभप्रचारणी…
शिवेति मंत्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्।।“


11. नकारात्मकता दूर करने के लिए

नेगेटिविटी हटाकर सकारात्मक वातावरण हेतु—

“इमं हि नित्यमेवमुक्तमुक्तमोत्तमं स्तवं…
शंकरस्य चिंतनम्।।“


12. ऐश्वर्य और धन-संपत्ति वृद्धि के लिए

समृद्धि हेतु प्रदोष काल में यह श्लोक पढ़ना शुभ माना गया है—

“पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं…
लक्ष्मीः सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः।।“


कैसे करें सही विधि से मंत्र जाप?

  • ब्रह्ममुहूर्त या महानिशीथ काल में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
  • कम से कम 108 बार मंत्र का जाप करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” का निरंतर जप भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

ध्यान रखें कि मंत्र-जाप के समय मन शांत और श्रद्धापूर्ण होना चाहिए। केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि भाव और एकाग्रता अधिक महत्वपूर्ण है।

महाशिवरात्रि 2026 का पर्व आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक किए गए मंत्र-जाप से मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से राहत मिलने की मान्यता है। विशेषकर महानिशीथ काल में शिव तांडव स्तोत्र के मंत्रों का जप साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

भगवान शिव की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो—यही कामना है।

हर हर महादेव!

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