कोलंबो/वॉशिंगटन/तेहरान: श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी हमला हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरान के एक सैन्य जहाज़ पर हुए कथित पनडुब्बी हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार इस हमले के बाद जहाज़ डूब गया, जिसमें सवार दर्जनों नौसैनिकों की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक लोग लापता और कम से कम 78 घायल बताए जा रहे हैं।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना श्रीलंका के दक्षिणी शहर गाले (Galle) से लगभग 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। जहाज़ से संकट संकेत मिलने के बाद श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने तत्काल संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब मध्य-पूर्व में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह हमला उस व्यापक संघर्ष का हिस्सा हो सकता है जो हाल के महीनों में तेज़ हुआ है।
क्या हुआ था? पनडुब्बी हमले में डूबा ईरानी युद्धपोत
रिपोर्टों के अनुसार ईरान का युद्धपोत IRIS Dena श्रीलंका के पास समुद्र में अचानक हमले का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि जहाज़ को टॉरपीडो से निशाना बनाया गया जिसके बाद उसमें विस्फोट हुआ और वह समुद्र में डूब गया।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमला कर इस जहाज़ को निशाना बनाया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार यह हमला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में किया गया।
बताया गया कि जहाज़ में लगभग 180 नौसैनिक सवार थे, जिनमें से बड़ी संख्या अभी भी लापता बताई जा रही है। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार कई शव भी घटनास्थल के आसपास समुद्र में पाए गए हैं।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि कम से कम 80 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी भी बदल सकते हैं क्योंकि बचाव अभियान जारी है।
श्रीलंका ने चलाया बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
जहाज़ से संकट संकेत मिलने के बाद श्रीलंका की नौसेना, तटरक्षक और वायुसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया।
श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार:
समुद्र से 32 नौसैनिकों को जीवित बचाया गया
घायलों को गाले के करापिटिया अस्पताल में भर्ती कराया गया
समुद्र में तेल का बड़ा धब्बा दिखाई दिया, जिससे जहाज़ के पूरी तरह डूबने की पुष्टि हुई
श्रीलंका ने यह भी कहा कि यह घटना उसके क्षेत्रीय जल से बाहर हुई लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत संकट में फंसे जहाज़ों की मदद करना उसकी जिम्मेदारी है।
बचाव अभियान अभी भी जारी है और कई देशों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं क्योंकि लापता नौसैनिकों की तलाश जारी है।
भारत से लौट रहा था ईरानी जहाज़
जानकारी के अनुसार यह युद्धपोत हाल ही में भारत में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम और मिलन (Milan) नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर वापस लौट रहा था।
यह अभ्यास विशाखापत्तनम में आयोजित हुआ था जिसमें कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था।
इस वजह से यह घटना भारत के समुद्री क्षेत्र के करीब होने के कारण भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में किसी सैन्य जहाज़ पर इस तरह का हमला क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ा मामला
इस हमले को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव कई मोर्चों पर बढ़ा है।
2026 में शुरू हुए संकट के दौरान:
अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हमले किए
ईरान ने इसके जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमले किए
ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही को रोकने की चेतावनी दी
इस पूरे घटनाक्रम के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।
IRIS Dena: ईरान का आधुनिक युद्धपोत
IRIS Dena ईरान की नौसेना का एक आधुनिक युद्धपोत था जिसे अंग्रेज़ी मीडिया अक्सर फ्रिगेट या डेस्ट्रॉयर के रूप में वर्णित करता है।
इसके कुछ प्रमुख तकनीकी पहलू इस प्रकार थे:
लंबाई लगभग 94 मीटर
वजन लगभग 1300–1500 टन
हेलीकॉप्टर लैंडिंग प्लेटफॉर्म
मिसाइल और आधुनिक हथियार प्रणाली
यह जहाज़ ईरान की नौसेना के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता था और इसकी तैनाती अक्सर लंबी दूरी के समुद्री अभियानों में की जाती थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस जहाज़ का डूबना ईरानी नौसेना के लिए हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सैन्य क्षति में से एक हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद दुनिया भर में राजनीतिक और सैन्य हलकों में हलचल तेज़ हो गई है।
ईरान ने अभी तक आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया है लेकिन घटना की जांच की बात कही है।
अमेरिका ने कहा है कि हमला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ और यह सैन्य कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई।
श्रीलंका ने तटस्थ रुख अपनाते हुए केवल मानवीय सहायता और बचाव अभियान पर ध्यान देने की बात कही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को और अधिक गंभीर बना सकती है।
वैश्विक सुरक्षा पर असर
हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से हर साल अरबों डॉलर का व्यापार होता है।
अगर इस क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ता है तो इसका असर कई देशों पर पड़ सकता है, खासकर:
एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार
तेल और गैस की आपूर्ति
वैश्विक नौसैनिक सुरक्षा
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो हिंद महासागर भी मध्य-पूर्व की तरह एक नए सैन्य टकराव का केंद्र बन सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस घटना की जांच जारी है और कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं:
हमले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं?
जहाज़ पर सवार सभी लोगों की स्थिति क्या है?
क्या इससे अमेरिका-ईरान युद्ध और बढ़ेगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएंगे।
हालांकि इतना तय है कि श्रीलंका के पास हुए इस पनडुब्बी हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है और दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ इसकी बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।


