वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में उतरे मुस्लिम समुदाय के लोग, 300 प्रदर्शनकारियों को 2 लाख का नोटिस

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में मस्जिद में काली पट्टी बांधकर नमाज़ अदा करते प्रदर्शनकारी मुस्लिम समुदाय के लोग।

उत्तर प्रदेश: वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के खिलाफ काली पट्टी बांधकर विरोध करने वाले 300 लोगों को पुलिस ने नोटिस जारी किए हैं। ये प्रदर्शन शुक्रवार, 28 मार्च को जुमे की नमाज के दौरान मस्जिदों में हुए थे। अधिकारियों ने CCTV फुटेज के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उन्हें 2 लाख रुपये के निजी मुचलके पर पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है।

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में मस्जिद में काली पट्टी बांधकर नमाज़ अदा करते प्रदर्शनकारी मुस्लिम समुदाय के लोग।

क्या है मामला?

राज्य में वक्फ अधिनियम 2025 के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने 28 मार्च को जुमे की नमाज के दौरान काली पट्टी पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन इस अधिनियम में हुए बदलावों के विरोध में था, जिन्हें मुस्लिम समुदाय “संविधान विरोधी” और “अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला” मान रहा है।

शहर के पुलिस अधीक्षक (सिटी) सत्यनारायण प्रजापत ने बताया कि अब तक 300 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। शुरुआत में यह संख्या 24 थी, जो शनिवार तक बढ़कर 300 हो गई है और पहचान की प्रक्रिया अब भी जारी है।

क्या कहा प्रशासन ने?

सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में 16 अप्रैल को कोर्ट में पेश होकर 2 लाख रुपये के निजी मुचलके भरने का आदेश दिया गया है। जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उन्होंने शहर की अलग-अलग मस्जिदों में काली पट्टियाँ बांधकर विरोध जताया था।

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर विवाद क्यों?

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को संसद ने हाल ही में पारित किया है। इस बिल को पहले लोकसभा में पारित किया गया, जहाँ 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने विरोध में वोट डाला। इसके बाद राज्यसभा में 128 सांसदों ने इसके पक्ष में और 95 ने विरोध में मतदान किया।

विपक्षी दलों ने इस विधेयक को “असंवैधानिक” और “अल्पसंख्यक विरोधी” बताते हुए इसका विरोध किया। वहीं सरकार का दावा है कि यह एक “ऐतिहासिक सुधार” है जो वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और मुस्लिम समुदाय के हित में होगा।

विपक्ष की आपत्तियाँ

कांग्रेस और AIMIM समेत कई मुस्लिम सांसदों ने इस अधिनियम में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने पर कड़ा विरोध जताया। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक पहचान के साथ सीधा हस्तक्षेप करार दिया।

प्रदर्शन का तरीका और प्रशासन की सख्ती

प्रदर्शनकारियों ने कोई नारेबाजी या हिंसा नहीं की थी, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से काली पट्टी बांधकर विरोध किया। इसके बावजूद उन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने नोटिस जारी किए हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया है।

क्या है आगे की राह?

अब सभी 300 प्रदर्शनकारियों को 16 अप्रैल को कोर्ट में पेश होना है। साथ ही प्रशासन और पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों की पहचान जारी है और यह संख्या आगे बढ़ सकती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top